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यह नारी है!

Manish Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रोती, सिसकती, अबला घर मे!
        
                                                    
                            
दुनिया कहे, संस्कारी है!

काम, काज जो बाहर करतीं!
कहे समाज, व्यभिचारी है!

कदम, कदम पे, भेड़िये बैठे,
गली, गली मे शिकारी है!

पीर न समझे, इनका कोई,
बड़ी अजीब, लाचारी है!

जिन चरणन मे, शीश झुकाती!
उसी हृदय को, ये ना भाँती!

भाति भाँति के, यतन करे, पर
उन्हे आजीवन ये, न सुहाती!

छलनी हृदय, लोचन मे आंसू!
मृदुल, कहें, यह "नारी" है!
11 महीने पहले
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Rabindra Aman

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