विज्ञापन

सर्दी

Manish Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इन सर्दियों में, कुछ खास है
        
                                                    
                            
रूमानियत का मोह पाश है।

ठंडी हवाओं के झोंके,
हसीन ख्वाबों के खुलें, झरोखे।

सन्नाटे में डूबी, लंबी रातें
तिलिस्मी नज़ारे, चांदनी की सौगातें।

रूई के फाहे सी नर्म ओस
मद मस्त फूलों को रहा नहीं होश।

प्रणव लालसा, आतुर श्वास
धूप की किरणों का लंबा वनवास।

लहू बदन के जम से जाते,
ऐसा है ये सर्दी का मास।
एक वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Kumar

4212 कविताएं

View Profile

Dn Chaubey

7122 कविताएं

View Profile

G S

6 कविताएं

View Profile