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प्रेम पिपासां

Manish Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उद्विग्न मन मे, प्रेम, आकांक्षा!
        
                                                    
                            
देह से समझो, देह की, भाषा!

हृदय, बिहंगम, फुले समाता!
देह को देख! देह, मदमाता!

सरस अधर, हुवे, रसवंती,
नैनों से, अंसुवन, झर जाता!

देह ही सृष्टि, देह मे सब है!
जग फिर क्यूँ! देह! झुठलाता!

आओ! निकट! देर करो मत!
विरह! व्यथा! ना झेला, जाता!

धक -धक,धक- धक,हृदय स्पंदित!
ऐसी होती, प्रेम पिपासां!!
एक वर्ष पहले
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