विज्ञापन

खेल निराले

Manish Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दिवा, रात्रि, चलता चालें,
        
                                                    
                            
किस्मत के हैं, खेल, निराले,

किस्मत जिसपे, हुई मेहरबां,
वो जीवन भर, मौज मना ले!

जिसपे इसकी, टेढी, दृष्टि,
वो जीवन मे, खाक, खंगाले,

मात वही देता, इसको जो,
सुख, दुःख की ना, भ्रांति पाले!

जो रहते, किस्मत के भरोसे,
अपनी नाव वो, खुद ही डुबा ले!

जिनको इससे लड़ने का, माद्दा,
वो दुनियाँ मे नाम, कमा लें!

जीवन है, एक बंद, तिजोरी,
किस्मत से ही, खुलते ये ताले!

कर्तव्यच्युत को कुछ नही मिलता,
चाहे जितना शोर, मचा लें!
मृदुल मनीष! जो है, मेहनतकश;
वो किस्मत को, दास, बना लें!
एक वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all