नज़रे चार होती थी, तुमसे,
काश फिर से, वो इतवार मिल जाती।
एक दूसरे से जुड़ा था, दिल से,
काश! जीवन का, वो सार मिल जाती!
प्रेम, वाटिका, पुष्प बिना, अधूरी है,
हृदय सुशोभित, वो उपहार मिल जाती!
गाहे, बेगाहे, रास्ते मे कभी,
वही, नई, नवेली, नार, मिल जाती!
बेफिक्र, अल्हड़,पुरवाई के झोंके सी,
काश! फिर वो बयार, मिल जाती!
लम्हो की ख्वाहिश मे, सदियाँ, गुजार दी, हमने!
काश! फुर्सत के वो पल, दो, चार, मिल जाती!