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अफ़सोस

Manish Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            डूबे भी तो समंदर में, अफ़सोस क्यूं करें,
        
                                                    
                            
हारे भी तो मुकद्दर से, अफ़सोस क्यूं करें।

आज वक्त नहीं अपना, मगर कल जरूर है,
कल वक्त था हमारा, ये गुरूर क्यों करें
वक्त सगा नहीं किसी का, फिर अफ़सोस क्यूं करें।

दिल टूटा है हमारा आपकी वजह से,
ये आपकी सौगात है, इनकार क्यूं करें।

करार ये कहां था आपसे, जिएंगे उम्र भर
तकदीर में ही मौत थी, अफ़सोस क्यूं करें।
3 वर्ष पहले
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