विज्ञापन

मेरे अल्फाज

Manish Meratiya

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कुछ वक़्त बदल रहा था,
        
                                                    
                            
कुछ हवाएं बदल रही थी,
मै चुप खड़ा था अब भी उसके इंतजार मे,
पर अब वो अदायें बदल रही थी ।
उनकी ख़ामोशी बढ़ रही थी,
उनके अल्फाज लडखड़ा रहे थे,
शायद नही रहा किस्मत मे मिलना मुनासिफ
क्यों अब वो अपने बदल रहे थे।
3 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all