बिन गरज तो बादल भी न बरसे,
फिर आ तो इण धरती रा बोझ |
बण्या बैठा वा मिनख है जो एक
कायर री भांति पीठ पीछे खंजर खोबे |
इंया सूं भला की ही उम्मीद रखी जावे
जो पल -पल सूं खुद की ही जुबान हु
पलट जावे ||___||