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बदलते किरदार

Mangan Jangid

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बिन गरज तो बादल भी न बरसे,
        
                                                    
                            
फिर आ तो इण धरती रा बोझ |

बण्या बैठा वा मिनख है जो एक
कायर री भांति पीठ पीछे खंजर खोबे |

इंया सूं भला की ही उम्मीद रखी जावे
जो पल -पल सूं खुद की ही जुबान हु
पलट जावे ||___||

 
एक घंटा पहले
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