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बदलते किरदार

                
                                                         
                            बिन गरज तो बादल भी न बरसे,
                                                                 
                            
फिर आ तो इण धरती रा बोझ |

बण्या बैठा वा मिनख है जो एक
कायर री भांति पीठ पीछे खंजर खोबे |

इंया सूं भला की ही उम्मीद रखी जावे
जो पल -पल सूं खुद की ही जुबान हु
पलट जावे ||___||

 
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42 मिनट पहले

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