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धर्म अधर्म का विकल्प

mamta tyagi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तटस्थ रहना कभी कोई विकल्प नहीं बन पाया था
        
                                                    
                            
तटस्थ रहकर पितामह एवं द्रोणाचार्य ने अधर्म का साथ निभाया था

सही ग़लत,धर्म अधर्म का भेद सबको समझना होगा
हर धर्मयुद्ध में सबको अपना अपना विकल्प चुनना होगा
एक वर्ष पहले
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