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यूं ही नहीं:.....

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उदास चेहरे
        
                                                    
                            
किसी के यूं ही
नहीं हो जाते
किसी अपनों के
दिए गहरी चोट के
असर होते हैं
माना वो रो कर
जाहिर नहीं करते
लेकिन अंदर ही
अंदर रोते हैं
दुनिया को
किसी की परवाह नहीं
दुनिया वाले खुद में
मशगूल रहते हैं
कौन किसका
खबर रखता है
सब भागते हुए
भीड़ के हिस्से हैं
यहां अपने ही
अपनों का हाल
नहीं पूछते
बुराइयों के लिए
सबसे पहले खड़े हैं
ताज्जुब होता
क्या नफरत करने वालों
को ता-उम्र इस धरा पर
रहना है.................।।
-ममता तिवारी
3 महीने पहले
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