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वह सपना कैसा

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सोना चांदी सब बेकार,
        
                                                    
                            
जब मिले ना अच्छे संस्कार,
संस्कार ही असली धरोहर,
जो विद्या से मिलेगी अपार।
संस्कार वह शक्ति जो उन्नति के बीज बोती,
अकड़ में हम वह भी हम गवाते,
जो हमारे नसीब होते
संस्कार युक्त जीवन से अनमोल कुछ भी नहीं होते संस्कार ही जीवन में खुशी के फूल खिलाते
वह हृदय कैसा जिसमें संस्कार ना हो
वह इंसान कैसा जिसमे व्यवहार ना हो,
वह जीवन कैसा जिसमे प्यार ना हो
वह घर कैसा जहां विद्या का वास ना हो
वह मानव कैसा जिसमें मानवता ना हो
वह आंखे कैसा जो कभी नम ना हो,
वह दिल कैसा जिसमें रहम ना हो
वह धड़कन कैसा जिसमें चाहत ना हो,
वह अपना कैसा जिसमें अपनापन ना हो
वह सपना कैसा जो नींद से जगाता ना हो।
8 महीने पहले
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