शब्दों के पीछे भागकर थक सी गयी हूं
कोशिश की तो बहुत तुझे समझने को
नाकाम होती दिखी मै हर बार ,
दर्द के जख्म खाकर तड़प सी गयी हूं
कैसे तुझे समझूं ये मेरे हमदम तेरे बातों के
छिपे हुए शब्दों के उलझे तारों को
उनको सुलझाने में थक सी गयी हूं