तलाशा ज़माने में खुशियां बहुत
खुशियां कहीं दिखीं नहीं
एक बार नजर पड़ी मां पर
और सारे उलझन सुलझ गई
तमाम खुशियां मुझे मां के
रूप में मिल गई सारे गिले
शिकवे मिट गए
जन्नत की ख़ुशी भी
फीकी पड़ गई मुझे
सारी दुनिया की दौलत
मेरे घर में ही मिल गई
मै ख़ुशी से खिल गई
मुझे सब कुछ मिल गई
-ममता तिवारी