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शायरी

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सारे ज़माने से लड़ा जाता जिनके लिए,
        
                                                    
                            
वही मिलते हाथों में बेख़ौफ खंजर लिए।

गैर को गैर कहें कैसे गैर भी तो अपने ही होते,
वहीं वक्त पर मरहम बनते जब अपने देते चोटे।
6 महीने पहले
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