सारे ज़माने से लड़ा जाता जिनके लिए,
वही मिलते हाथों में बेख़ौफ खंजर लिए।
गैर को गैर कहें कैसे गैर भी तो अपने ही होते,
वहीं वक्त पर मरहम बनते जब अपने देते चोटे।