हिम्मत रखे कुछ करने की
काम नहीं भाग्य पर बैठने की,
जरूरत हैं सफलता की सीढ़ी चढ़ने की,
फितरत रखे ऊंचा उड़ने की।
धीर जो होता वही पहाड़ चढ़ता
तूफानों से लड़ के अलग अपना,
मुकाम बनाता,
अपने हौसलों के दम पर आसमान छूता,
ख्वाब सजाएं एक सफलता की।
आतप, आग, ठंड, बारिश सब झेलता,
सब झेलकर ही इंसान निखरता।
मेहनत से सपना परवान चढ़ता,
आलस्य बाधा उत्पन्न करता,
उन्नत बीज से खुद को सींचता,
तभी तो विजय का हार पहनता।
हसरत रखे कुछ बदलने की,
काम नहीं अब डरने की,
फितरत रखे ऊंचा उड़ने की,
संकल्प लें जिंदगी बदलने की।