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राहत मेरी: कविता

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चाहत मेरी,
        
                                                    
                            
राहत मेरी,
दुनिया, जहां हो।
लिखे तो लिखे कैसे?
कविता तू मेरी क्या हो।
दिल,मेरी धड़कन मेरी,
जीने की अरमान हो।
लिखे तो लिखे कैसे?
कविता तुम मेरी क्या हो।
सुबह मेरी, शाम मेरी,
तुम ही दिन और रात हो।
देती हो साथ, पकड़ लेती हो हाथ,
गिरने ना देती हो।
शब्दों में बयां करे कैसे?
तुम मेरी क्या हो।
-ममता तिवारी
7 महीने पहले
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