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रब को तो बाद में देखा

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रब को तो बाद में देखा,
        
                                                    
                            
पहले मां नजर आई।
सारा जमाना बुराई देखता,
मां सिर्फ देखती अच्छाई।

जमाने भर की खुशियां,
कहां हमें नजर आई,
जहां-जहां नजरे गई,
सिर्फ मां ही देती दिखाई।

सैकड़ों कमियां होती,
मां सारी खूबियां ढूंढ लेती,
दुनिया कितना भी दर्द दे,
मां सारे दर्द हर लेती।

खुदा भी न सह पाते,
एक मां जितना जख्म सहती,
अपने बच्चों के मन्नत के लिए,
खाली पांव पहाड़ चढ़ती।

भले पांव हो जाए चोटिल,
कभी ना उफ़ कहती,
अपने जख्मों को हिम्मत बनाकर,
उत्साह से आगे बढ़ती।

समुद्र में भी उतनी गहराई नहीं,
जितनी एक मां में गहराई होती,
सारा जमाना एक तरफ,
एक तरफ अकेले सिर्फ मां होती।

मां का प्यार,अदभुत चमत्कार।।
-ममता तिवारी
7 महीने पहले
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