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परोपकार से अच्छा कुछ भी नहीं

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सारे कायनात चमकते हैं, बेहतरीन फूलों से,
        
                                                    
                            
इंसान चमकते हैं, अपने बेहतरीन वसूलो से।

फूलों के खूबसूरत अंदाज बयां करते हैं,
मुस्कान से अच्छा कुछ भी नहीं,
दिवाकर रोज निकलकर बताते हैं,
परोपकार से अच्छा कुछ भी नहीं।
-ममता तिवारी
7 महीने पहले
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