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पन्नों पर उतार देती हूँ:.....

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जो मन में आता लिखती हूँ
        
                                                    
                            
जो दिल को भाता लिखती हूँ
जज्बातों को अपने लिखती हूँ
एहसासों को अपने लिखती हूँ

कोरे कागज पर लिखती हूँ
सुबह-शाम लिखती हूँ
दिल के अरमान लिखती हूँ
दिल से लिखती हूँ

ना साहित्यकार हूँ
ना कहानीकार हूँ
ना कवयित्री हूँ
ना लेखिका हूँ

सिर्फ कलम से
मन के भावों को लिखती हूँ
कलम को सहेली बना
गुफ्तगू करती हूँ

दिल की ख़ुशी के लिए
लिखती हूँ
मन के सुकून के लिए
लिखती हूँ

दिल की तसल्ली के लिए
लिखती हूँ
रूह के सुकून के लिए
लिखती हूँ

समझने वाले यूं ही
समझ लेते हैं कि
मैं एक रचनाकार
कवि या लेखक हूँ

पर मैं,
वास्तव में अपनी
मां की छवि हूँ
कलम से खेलती हूँ
और जो मन में आए
बेझिझक पन्नों पर उतार देती हूँ।।
-ममता तिवारी
एक महीने पहले
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