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पैग़ाम दिल को दिया है

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चलती हवाओं ने
        
                                                    
                            
पैगाम दिल को दिया है
हमने खुद अपने हाथों से
प्रकृति में रंग भर दिया है
हर तरफ हरे भरे
लहलहाते...........
पेड़ फल फूल पौधों का
सृजन किया है
मस्त-मस्त हवा का
झोंका हूं मैं
मुर्दे में भी जान
डाल दिया है
बसंती हवा हूं मैं
हर तरफ..........
खुशियां बिखेर दिया है
फलक से जमीं तक
मेरी ही हस्ती है
सांस मेरे बिन,
कहां किसी की चलती है
मैं अनोखी हवा हूं
मेरी बात ही,........
अनूठी,अलबेली है
हर तरफ मौसम,
देखो, खिली खिली है
चलती हवाओं ने,
पैग़ाम दिल को दिया है
मैनें अपने हाथों से......
प्रकृति की सोलहो
शृंगार किया है।।
-ममता तिवारी
4 महीने पहले
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