चलती हवाओं ने
पैगाम दिल को दिया है
हमने खुद अपने हाथों से
प्रकृति में रंग भर दिया है
हर तरफ हरे भरे
लहलहाते...........
पेड़ फल फूल पौधों का
सृजन किया है
मस्त-मस्त हवा का
झोंका हूं मैं
मुर्दे में भी जान
डाल दिया है
बसंती हवा हूं मैं
हर तरफ..........
खुशियां बिखेर दिया है
फलक से जमीं तक
मेरी ही हस्ती है
सांस मेरे बिन,
कहां किसी की चलती है
मैं अनोखी हवा हूं
मेरी बात ही,........
अनूठी,अलबेली है
हर तरफ मौसम,
देखो, खिली खिली है
चलती हवाओं ने,
पैग़ाम दिल को दिया है
मैनें अपने हाथों से......
प्रकृति की सोलहो
शृंगार किया है।।
-ममता तिवारी
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