"बारिश"
करे कोई तुम्हारा
इंतजार बेसब्री से
कोई परेशान हो जाता
आकर वक्त वे वक्त
किसी को तंग कर देती
किसी के जीवन में
खुशी के रंग भर देती
किसी के लिए सुकून बनके आती
किसी का चैन सुकून सब छिन लेती
हरियाली लेकर आती
हरा-भरा खेत खलिहान
देख मन हो जाता प्रफुल्लित
कही गरीबों के आशियाने
उजड़ जाने पर मन हो जाता दुखित
बारिश के मौसम आते ही
किसी के मन में स्वादिष्ट पकौड़े
तलने का ख्याल आता
तो कोई बेघर हो जाता
बारिश,तुम्हारे न आने से
पड़ सकता है अकाल
इसलिए आना तो जरूर
लेकिन जब आओ तो
इतना ख्याल रखना
कि किसी को परेशानी न हो"
या यों कहें कि"बिन
तेरे बारिश,अकाल
का डर सताए
आना जरूर, पर
बरसना ऐसे कि कोई गरीब न मुरझाए
उतना ही बरसना जिससे फसलें लहलहाएं
उतना भी मेहरबान मत हो जाना जिससे
आम जनता संकट में आ जाए
काले बदरा ने विध्वंश ही कर डाले
कैसे बनेंगे गरीबों के घर निवाले
नन्हे-नन्हे फूल कुम्हलाने लगे हैं
वो भी आसमां की ओर निहारने लगे हैं
बच्चे मासूम विवशता की चादर ओढ़
अपनी जिंदगी की दुआ मांगने लगे हैं
खुशियों की सौगात बनकर आना
सबके चेहरे पर हरियाली सजाना
आंसुओं का बदरा बन मत बरसना
-ममता तिवारी