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मनोहर बाल कविता

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            छोटे छोटे दो सगे भाई
        
                                                    
                            
खा रहे थे मिठाई
मुन्नी दौड़ी आई
देखो मै लाई सुंदर सुंदर
तिल चिवरा की लाई
तुम लोग दो मिठाई
फिर मैं दूंगी स्वादिष्ट
लाई मेरी मां ने बहुत
शिद्दत से इसे बनाई
छोटा भाई बोला
मेरे पापा भी बाजार
से लाए हैं मिठाई
चलो एक दूसरे को
बांट कर खाते है
इसी में है भलाई
मुन्नी चल पड़ी
अपने घर मिलूंगी
फिर कल आकर
तुम लोग पढ़ो
घर जाकर
मै जा रही हूं होमवर्क
करने वरना मार पड़ेगी
स्कूल जाकर
मम्मी की डांट पड़ेगी
घर आकर
सब चले गए अपने घर
स्वादिष्ट मिठाई खाकर
8 महीने पहले
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