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मां के बिन चैन से कहां रहते

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हम उठते तो मां कहते,
        
                                                    
                            
सोते तो मां कहते,
एक पल एक दिन मां के बिन,
चैन से कहां रहते।

ईश्वर भी निश्चित हो जाते,
मां के बदौलत नहीं तो वह भी,
ऊपर चैन से कहां बैठते।

चेहरे पर मुस्कान देती,
अपना सब अरमान देती,
हौसला सौ गुना बढ़ाती,
दर्द सब घटा देती।

इतना सही हिसाब,
सिर्फ मां ही करती है।

भगवान तो इतने हिसाब में
चूक कर देते,
इसीलिए, तो हर घर में,
एक मां नाम का चमत्कार भेजते।

बच्चों के जीवन में,
खुशी के रंग बिखेरते
मां को देखने में जो सुकून मिलता,
वह फूल कहां किसी बागों में खिलता। 

वह जख्म जो जमाना देता,
मां के प्यार से ही भरता।

अनंत खुशियां है जमाने में,
चैन है मां के सिरहाने में,
पूरा समय लगा देती संवारने में,
रात गुजार देती लोरी सुनाने में।

एक पल, एक दिन मां के,
बिना हम चैन से कहां रहते,
उठते तो मां कहते सोते तो,
मां कहते मां के बिन हम,
चैन से कहां रहते।

- ममता तिवारी 
7 महीने पहले
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