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लिखती हूं

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            प्रतिदिन खुद को लिखती हूं सुबह से उठकर
        
                                                    
                            
रात होते–होते खुद ही खुद को मिटाने लगती हूं
अपने आप से मजबूर होकर,
हर दिन खुद ही सोचती हूं अपने वजूद को
दिन हफ्ते महीने ये सोचा करती हूं
फिर अपनो के लिए खुद ही खुद को भुला देती हूं
उनकी खुशियों के....
8 महीने पहले
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