कुछ तो बात होगी प्यार में,
वरना महलों की राजकुमारी,
अकिंचन,भस्म रमाए योगी की दीवानी न होती
अगर पार्वती जी ने महल, अटारी त्यागी न होती,
यदि उनके मन में प्यार के पुष्प खिले ना होते
युगो युगांतर तक मशहूर ये कहानी ना होती।