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किताबे देखती है ग़जल

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मेरे दिल की आवाज सुनती है
        
                                                    
                            
मुझसे बेहद मोहब्बत करती है
मैं उसकी भाषा समझती हूं
वह खिल उठती है
किताबें मेरी तरफ देखती है
इसकी गुफ्तगू सारे जहां से निराली
भर देती जीवन में खुशहाली
होने नहीं देती कभी निराश और खाली
तन्हाई की सबसे बड़ी हमदर्द और साथी
सारे ज़ख्म दर्द गम को चुटकी में हर लेती है
पता नहीं कहां से इतनी इल्म और तरकीबे सीखी है पढ़ने से मन भरता नहीं
इसका साथ खूब भाता है
दिल को लुभाती है
हमेशा करीब बुलाती है
राज दिल खोलती है
खुशियों से मन भर देती है
किताबें मेरी तरफ देखती है
- ममता तिवारी
 
8 महीने पहले
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