विज्ञापन

खुशियों की चाभी

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            खुशियां हम पर बहुत लुटाती,
        
                                                    
                            
नित दिन प्रात काल उठ जाती
जगमग जगमग ज्योत जलाती,
मां हमारी खुशियों की चाभी।

हर तरफ खुशी बिखेरती
प्यार का खजाना हम पर लुटाती,
मंद मंद खूब मुस्काती
अपने हंसी से हमारा मन हर्षाती।

खुशी-खुशी सब काम करती,
कभी न थकान का नाम लेती।
सबको पहले खाना खिलाती
सबसे अंत में खूद खाती।

प्यार के रत्न से हमें सजाती,
चम चम चम चम हमें चमकाती
हरदम हमें निखारती रहती,
स्वच्छता की हमें पाठ पढ़ाती।

स्कूल के लिए तैयार करती,
हम पर प्रगाढ़ विश्वास करती
हमें न कभी निराश करती,
समय पर पूरी सब आश करती।

वही है हमारी सुख शांति,
वही है हमारी खुशियों की चाभी।
7 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Kumar

4215 कविताएं

View Profile

Nema Ram

141 कविताएं

View Profile