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खुद के करीब आते गए:.......

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रफ्ता-रफ्ता खुद के करीब आते गए
        
                                                    
                            
रूहानी रंग बनके दिल में समाते गए
रूहानियत एहसास है स्याही
तेरी खुशबू में यूं ही नहीं,
तेरी खुशबू में खुद को लुटाते गए
सुकून बन समा गई दिल में
करीब खिंचे आते गए...................
रूहानी एहसास में खुद को डुबाते गए
ज़ख्मों पर अपने खुद ही मरहम लगाते गए
तुझे स्याही अपनाते गए..................
और खुद को खुद के करीब पाते गए
अब तो तन्हाई भी महफ़िल सजाती है मेरी
अब तो तन्हाई भी महफ़िल सजाती है मेरी
गमों को गुलदस्ता बनाते गए.............
रफ्ता-रफ्ता खुद के करीब आते गए
रूहानी रंग बनके दिल में समाते गए।।
-ममता तिवारी
3 महीने पहले
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