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कविता: किताबों के जैसा कौन

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हम हैं दिया वह है बाती
        
                                                    
                            
सबसे सही राह दिखाती
हमसफर और हमदर्द बनजाती
किताबों के जैसा कौन है साथी

चुप रह के इतना कुछ बोलती
सही इंसान बनने में मदद करती
कभी भी अकड़ के बात न करती
किताबों के जैसा कौन है साथी

शून्य ही हम धरती पर आते
किताबें न होती शून्य रह जाते
कहां से गलत सही की पहचानें
होती।
किताबों के जैसा कौन है साथी

हर पल साथ निभाती
ज्ञान के हीरे मोती लुटाती
शोर शराबों से दूर रहती
अच्छी-अच्छी बातें बताती
किताबों के जैसा कौन है साथी

खुद शांत बैठी रहती
सबको बोलना सिखाती
आसमानों की सैर कराती
ऊंचाई की सीढ़ी चढाती

कठिनाइयों से निकालती
बिना शोर किए बातें करती
मुकाम तक पहुंचाती
किताबों के जैसा कौन है साथी
-ममता तिवारी
5 महीने पहले
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