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कांटों और फूलों से: कविता

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कांटों को भी हम कोमल
        
                                                    
                            
नजरों से देखते हैं।
लोग फूलों को कैसे,
कुचल देते हैं।
फूल,कांटे दोनों विपरीत होते,
हुए भी एक साथ रहते है।
फिर हम इंसान थोड़ी सी विपरीत
स्थितियों में धैर्य क्यों खो देते हैं।
हम फूल और कांटे की तरह,
दुख और सुख में सामंजस्य,
बैठा लेते हैं।
हम भी इन दोनों की तरह
हर परिस्थितियों में खुश रहते है।
एक गुण हम फूल और कांटों से सीखते है।
हम भी खूबसूरत मुस्कान बिखरते हैं।
कांटो और फूलों के तरह हम भी मिसाल बनते हैं।
7 महीने पहले
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