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कलम मेरी जानती है:.....

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मुझे क्या लिखना है
        
                                                    
                            
क्या नहीं लिखना है
कलम मेरी जानती है
ये मेरे भाव को पहचानती है
ये मेरे रग-रग से वाकिफ है
सो जाती हूं तो सो जाती है
उठ जाती हूं तो उठ जाती है
किसी का दुख,दर्द
देखे तो नम हो जाती है
हँसी खुशी में खिल जाती है
किसी का झूठ बर्दाश्त नहीं करती
सच पर सर ऊंचा कर लेती है
क्या बताऊं मुझसे
कितनी वफ़ा करती है
ग़मो को मेरे दफा करती है
हंसती हूं तो हंसती है
रोती हूं तो रोती है
उदासी में मेरे हाथों में आकर
मेरी तरफ देखने लगती है
जैसे कह रही हो
मैं हूं ना............
दिल मेरा सभी गमों से परे
इसके दिलकश अंदाज में डूब जाता है
और खुशी की किरण मेरे तमाम उदासी
को अपने आगोश में समेट लेती है
मैं क्या लिखती हूं क्या नहीं
ये मेरी कलम ही जाने क्योंकि,
ये मुझको मुझसे बेहतर जानती है।।
-ममता तिवारी
 
4 महीने पहले
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