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कड़कती धूप:कविता

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कड़कती धूप
        
                                                    
                            
बेतहाशा गर्मी
हवाएं भी दिखा नहीं रही
अपनी नर्मी
कहीं भी नहीं है
ओस की नमी
अगर तुम आओ हवा बन के
बात होगी हनी
मधुर वादियों में
मौसम हाेगा खुशियों से भरी
शीतलता की चादर ओढ़
खूब इठलाती
कविता पढूंगी फनी
तुमको पाकर हो जाऊंगी
मैं सबसे धनी
खुशियों में खो जाऊंगी
मैं मन मन ही।।
-ममता तिवारी
4 महीने पहले
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