कड़कती धूप
बेतहाशा गर्मी
हवाएं भी दिखा नहीं रही
अपनी नर्मी
कहीं भी नहीं है
ओस की नमी
अगर तुम आओ हवा बन के
बात होगी हनी
मधुर वादियों में
मौसम हाेगा खुशियों से भरी
शीतलता की चादर ओढ़
खूब इठलाती
कविता पढूंगी फनी
तुमको पाकर हो जाऊंगी
मैं सबसे धनी
खुशियों में खो जाऊंगी
मैं मन मन ही।।
-ममता तिवारी
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