जीवन में कोई रंग नहीं,
विद्या मां आप जब संग नहीं,
रहता हरदम तंग वही जिसके
जिसके हृदय में आपका वास नहीं।
यूं तो साल भर में आती,
हृदय में विराजमान रहती सदा,
विद्या का इच्छुक हो नहीं सकता
आपसे जुदा।
प्यार अपना लुटाती आप सबसे करती वफ़ा,
रहती जहां सुख शांति धन धान्य रहता वहा।
आपसे सब सपना साकार,
आप जीवन को देती आकर
आपका हम पर बहुत उपकार,
हम व्यक्त करते आभार।
चारों दिशा में ज्ञान बांटती
विद्या का धन खूब लुटाती,
प्यार अपना बरसाती,
देती मूर्खता से आजादी।
आपसे ही ज्ञान का ज्योत जले,
सर्वत्र उजियार करके,
ज्ञान का भंडार भरके
आप हमें करती कृतार्थ।
शत-शत नमन मां
आपको बार-बार प्रणाम
अनंत बार अभिनन्दन,
असंख्य बार वंदन
रहती दिल में हर दम
- ममता तिवारी