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हाथों में कलम दीजिए पापा

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मेहंदी से पहले हाथों में कलम दीजिए पापा,
        
                                                    
                            
दुनियां को पढ़ना सीख जाने दीजिए पापा,
कलम चलाने के काबिल बन जाने दीजिए पापा,
रूढ़िवादिता को तोड़ दीजिए पापा।
पहले शिक्षा का गहना पहनने दीजिए पापा,
बाद में भारी भरकम जेवरातों से सजने दीजिए पापा
पहले, शिक्षा से ऊपर उठने दीजिए पापा,
बाद में जिम्मेदारियों के नीचे दबने दीजिए पापा।
पहले दुनिया को समझने दीजिए पापा,
बाद में सोने का हार पहनने दीजिए पापा,
रूढ़िवादिता को तोड़ दीजिए पापा।
समाज से पहले बेटी से नाता जोड़ लीजिए पापा,
समाज के बनाए मान्यताओं, रीति रिवाजों को तोड़ दीजिए पापा,
रूढ़िवादिता को तोड़ दीजिए पापा।
पहले हार -जीत समझ जाने दीजिए पापा,
बाद में नौ लखा हार से लद जाने दीजिए पापा,
खुलने दीजिए पंख यह है जिज्ञासा,
मन को विद्या के धन से भर जाने दीजिए पापा।
फिर गृहस्थी का धन संभालने दीजिए पापा,
हमारे पैरों को स्वतंत्रता से रेंगने दीजिए पापा,
बाद में पैरों में बेरिया डाल दीजिए पापा।
पहले चंचलता कि ओढ़नी ओढ़ चहक लेने दीजिए पापा,
बाद में बेस कीमती चुनरी, लहंगा पहन बैठ जाने दीजिए पापा,
रूढ़िवादिता को तोड़ दीजिए पापा।
समाज से पहले बेटी को समझ लीजिए पापा,
पूरी हो जाने दीजिए पढ़ने की अभिलाषा,
बाद में जिंदगी खुद करेगी तमाशा,
हर आंधियों तूफानों से टकरा जाने के
हिम्मत आ जाने दीजिए पापा।
बाद में कोई नहीं देगा दिलासा,
ख़ुद को योग्य बन जाने दीजिए पापा,
हमें विद्या रूपी हीरे, मोती, सोना, चांदी
से सुशोभित हो जाने दीजिए पापा।
बाद में जिम्मेदारी की साड़ी,
पहनने दीजिए पापा,
यही है अभिलाषा,
हमें पढ़ने का मौका,
दीजिए पापा।।...…..…....…
7 महीने पहले
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