कविता, लोग कहते हैं
इक्कीस मार्च को कविता दिवस है
मैं तो कहती हूं
तुम्हारे बिना,कोई दिवस ही नहीं है
तुम ऊर्जा हो,आत्मबल हो
तुम आज और कल हो
तुम तब साथ देती हो
जब दूर दूर तक कोई अपना नहीं दिखता
तुम आंखों की रोशनी हो
बाजुओं की ताकत हो
दिल की धड़कन हो
शरीर में आत्मा हो
जीता जागता परमात्मा हो
सहारा,हौसला इंसान किससे मांगे
कौन है यहां, जो सही राह दिखा दे
तुम डूबते को किनारा देती हो
गिरते को थाम लेती हो
फिर कैसे कहें, कि तुम कभी-कभी साथ देती हो
कठिन से कठिन परिस्थितियों से,
बाहर निकाल देती हो
हमेशा हमदर्द और सहायक बन जाती हो
रोते हुए को भी हंसा देती हो
जख्मों को प्यार से हर लेती हो
त्योहारों में रंग भर देती हो
हर्ष उल्लास से प्रफुल्लित कर देती हो
कविता,
मैं तुम्हें, उत्सव की तरह जीती हूं
दिल की गहराई से चाहती हूं
दिल की धड़कन में बसाती हूं
कभी खुद को तुमसे जुदा नहीं करती
हर दिन, हर पल, इक्कीस मार्च मनाती हूं।।
-ममता तिवारी