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एहसासों के पन्नों पर

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एहसासों के पन्नों पर जज्बातों के कलम से
        
                                                    
                            
मैने एक प्यारी सी कविता लिखी
उसकी अनुभूति दिल को छूती
समझो मुझ पर क्या बीती
खुशी की मन में पटाखे फूटे
मै हवा में उड़ने लगी बन के गुब्बारे
उस वक्त मुझे कुछ ना सूझी
मै हूं मां के प्यार की भूखी
उनकी बातों से हो जाती सुखी
आ जाती चेहरे पर सुर्खी
मां में होती बहुत खूबसूरती
मां होती दया की मूर्ति
मां हमे प्यार से घूरती
मां हर गमों से बचाती
मां को मिली है ख्याति
मां है खुशियों की चाबी
मां से ही जगत सुहाती
मां से घर मन्दिर हो जाती
मां मुश्किलों में ढाल बन जाती
मां को कितने इल्म आती
मां हर जख्मों को बारीकी से सिलती
मां की यहीं अदा उन्हें यूनिक बनाती
मां सूझ बूझ समझदारी से घर चलाती
मां जैसी समझदारी कहां किसी को आती
मां घर आंगन को जन्नत सा चमकाती
मां हमें कामयाब और सफल बनाती
मां हमें हंसके जीवन जीना सिखाती
मां हमे मुसीबतों से लड़ना सिखाती
मां संस्कार रूपी गहनों से सजाती
मां में गुण अनेक कितना कोई लिखे
लेख कलम की स्याही कम पर जाएं
शायद कम पर जाएं पन्ना पेज
शब्दों के सागर में शब्द के मोती
कम पर जाएं कम नहीं पड़ती उनकी
निस्वार्थ प्रेम भावना करुणा हृदय
विदारक संघर्षरत कर्तव्यो की खूबसूरत
दास्तान उनका योगदान उपकार अप्रतिम
व्यवहार अदभुत देती एहसास मां है पूर्ण
विश्वास मां की महिमा विश्व विख्यात मां है
जीता जागता भगवान मां की हंसी दिल में बसी
एहसासों के पन्नों पर दिल की कलम से एक
छोटी सी कोशिश की मां के चमत्कार की
वर्णन करने की हम उतने सक्षम नहीं जतनी
मां है सामर्थ्यवान हम लिखे कैसे मां तो लेखनी
से भी महान इसीलिए मां का नाम पड़ा भगवान
मुझे प्यार की अनुभूति हुई मै भाव विभोर हुई
खुशियों की सौगात मिली मन हसीं से खिली
अगले पेज में .......
 
8 महीने पहले
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