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एहसासों के धागे शायरी

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            शाखों से टूटे पत्ते फिर शाखों पर कहां जाते हैं
        
                                                    
                            
एक बार जो उतर जाए दिल से
वह फिर दिल में जगह कहां पाते है

संभल कर चलना भी जरूरी है राहों के कांटो से
निकलना भी जरूरी है अतीत के चुभी हालातों से

दर्दे दिल देके लोग हाल नहीं पूछते
तुम रहोगे बेचैन वे लगाव नहीं रखते

तन्हा ही आयें तन्हा ही जाना है
खुद का ही सहारा मिलता यहां है
बात जितनी जल्दी हम समझ ले
होता हमारा ही उपकार और भला है

साथ कोई देगा ये ख्वाब ही हो सकता है
अंधेरे में खुद का परछाईं भी साथ छोड़ देता है

गैरों का सहारा मिल ही जाएगा राहों में
अपनों को पग पग पर बदलते देखा है

कहने के लिए सब कहेंगे आपकी
फिक्र ज्यादा है आजमाकर देखो यहां
निभाता कौन वादा है दिलासे के लिए
यह लब्ज बहुत अच्छा है लेकिन दूर से
सब कहेंगे आपकी फिक्र बहुत ज्यादा है
8 महीने पहले
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