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चिड़ियों की बात निराली: कविता

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चिड़ियों की बात निराली
        
                                                    
                            
बैठ जाती डाली डाली
रोके ना उसको हवा तूफानी
आसमान की है वह दीवानी

पंख खोल के उड़ना जानती
कभी ना वह डरना जानती
निडरता की पाठ पढ़ी है
कभी ना वह हार मानती

सुबह सवेरे उठ जाती
हमको भी बिस्तर से जगाती
कर्तव्यों का एहसास दिलाती
कर्म जरूरी हमें बताती

उसको आजादी बहुत प्यारी
खुले आसमान में उड़ना जानती
तिनके तिनके चुन चुन कर
अपना आशियाना बनाती

ठंडी, गर्मी, सर्दी, बारिश
कोई नहीं करता उसको तंग
इसका एक अलग ढंग
भर देती जीवन में रंग

इसकी अदा सबसे जुदा
करती गमों को विदा
हो जाता दिल उस पर फिदा
चिड़ियों की बात निराली
बैठ जाती डाली डाली।।
-ममता तिवारी
7 महीने पहले
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