विज्ञापन

चलों किताबों को

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चलों किताबों को जिंदगी का हिस्सा बना लेते है,
        
                                                    
                            
उसको ही अपना फरिश्ता बना लेते है।
दिल, दिमाग एकबार उसमें लगा लेते है,
चलो एक बार उसे दिल से अपना लेते है।
उसके कहे अनुसार एक बार चल लेते है,
उसको भी साथ निभाने का मौका देते है।
अपनी उलझनों को एकबार उसको सुना देते है,
एकबार उसे हमराज और दिलवर बना लेते है।
अपना हाले दिल उसको सुना देते है,
उसको जिंदगी में सबसे खास स्थान देते है।
उसका भी दिल से स्वागत, सत्कार कर लेते है,
उसको अपने दिल का मेहमान बना लेते है।।
-ममता तिवारी
6 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Kumar

4215 कविताएं

View Profile

Priyanshu Saini

1 कविता

View Profile

N manglam

371 कविताएं

View Profile

Gurdeep Singh

143 कविताएं

View Profile