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भ्रम सी ये मेरी जिंदगी

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इक भ्रम में गुजर रही है ये आत्मा मेरी।
        
                                                    
                            
चाह भी किसी नहीं जब चाह कभी पूरी न हो,
ख्वाहिश भी दर्द की है जब खुशियों से कभी भेंट न हो,
झूठी दिलासा खुद को देती हू जख्मों को मरहम बनाकर,
खुद के सपनो को हर कदम पे दफन करती हु
एक अनकही शब्दों सी में बीत रही ये मेरी जिंदगी।
अपने वजूद को भूलकर फिक्र है अपनो के वजूद का
अपनो के दर्द में खुद को मिटा रही हु ये मेरी नाकामी है,
जो चाहा वो कभी मुझे मिला नहीं न गिला है न शिकायत
एक अधूरे ख्वाब में सिमट सी गई है ये मेरी हर पल की सांसें...
एक वर्ष पहले
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kamal jha

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