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बचपन की यादें

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चंचल चुलबुल थोड़ी
        
                                                    
                            
जिद्दी थोड़ी मै भोली
भाली थी आसमान
में उड़ने की मै बहुत
दीवानी थी पंखों पर
अटूट विश्वास था
हौसले भी बुलंद थे
नहीं किसी का फिक्र था
सपने भी स्वच्छंद थे
हर तरफ़ बसंत थे
मन में भी उमंग थे
वीरो की गाथाएं सुनने
के बड़े शौक थे वो भी
क्या दौड़ थे हम सब
आसमान की परियों
के दीवाने थे वो भी क्या
ज़माने थे केवल खिलौने
भाते थे माता पिता के
भाई बहन के प्यार से
चेहरे खिल जाते थे वो
भी दिन बड़े सुहाने थे
खूबसूरत बचपन के ज़माने
थे काम केवल हंसना और
हंसाने थे दादी नानी के
किस्से कहानियों के बड़े
दीवाने थे
8 महीने पहले
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