कभी बन जाती झांसी की रानी,
कभी बन जाती मां सीता सती।
लड़कियां अब कमजोर नहीं आसमान भी छूती।
गौरव है, गाथा है, अनुपम है उसकी विभूति।
प्यार, संवेदना कोमलता की है प्रतिमूर्ति।।
-ममता तिवारी