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जो बन सको न

mamta singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इन बे-मुरव्वत,
        
                                                    
                            
गमों के चक्कर में,
हॅ॑सना मत भूल जाना।
काॅ॑टे बिछाते-बिछाते तुम,
ख़ुद के पाॅ॑व में,
चुभाते मत शूल जाना।

आंधी बनना,चाहें तूफाॅ॑ बनना,
नहीं दिल का पर खौफ बनना।
जो बन सको न आसमाॅ॑ किसी का
तो उड़ाते मत धूल जाना।
2 वर्ष पहले
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