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हम मरते चले गए

mamta singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            काम ये उसकी ख़ातिर करते चले गए,
        
                                                    
                            
जीने की आरज़ू में हम मरते चले गए।
कब,कहाॅ॑,कैसे कुछ पता ही ना चला,
नए मिलें और पुराने ज़ख़्म भरते चले गए।
2 वर्ष पहले
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