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दो तरह की औरतें

Mamta Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कभी ध्यान से देखा है
        
                                                    
                            
नौकरी करती हुई
ए सी कमरे में बैठी
करीने से साड़ी पहनकर
हेयर ड्रायर से बाल सैट करके
उन महिलाओं को ?
कितनी इज़्ज़त मिलती है
हर बात में सराही जाती हैं
घर नहीं देख पाने का ताना
उन्हें कभी नहीं सुनना पड़ता है
क्योंकि उनको तनख्वाह मिलती है
तानें नहीं मिलते
वैसे अपवाद हर जगह है,

कभी ध्यान से देखा है
घर में काम करती हुई
रसोई में खाना पकाते हुए
पसीने से लथपथ कपड़ों में
बेतरतीब बालों में
उन महिलाओं को
कितना अपमानित होती हैं
हर बात पर बातें सुनती हैं
बाहर नौकरी ना कर पाने का ताना
उन्हें भर-भरकर मिलता है
क्योंकि उनको तनख्वाह नहीं मिलती है
तानें रोज़ मिलते हैं
वैसे अपवाद हर जगह है।
-ममता सिंह देवा 
एक वर्ष पहले
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