जब जैसा चाहा तुमने,
ठीक वैसा किया हमनें।
कहाॅ॑ फिर कमी रह गई,
या जा'दा कर दिया हमने।
जिसे तुमने अपनाया नहीं,
उसे संभाल लिया हमनें।
घेरा ग़म के अंधेरों ने तो दीया,
यक़ी का जला दिया हमने।
तुम अदा उसका शुक्र करो,
तुमसा जो नहीं किया हमने।