विज्ञापन

दीया यकींन का

mamta singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब जैसा चाहा तुमने,
        
                                                    
                            
ठीक वैसा किया हमनें।
कहाॅ॑ फिर कमी रह गई,
या जा'दा कर दिया हमने।
जिसे तुमने अपनाया नहीं,
उसे संभाल लिया हमनें।
घेरा ग़म के अंधेरों ने तो दीया,
यक़ी का जला दिया हमने।
तुम अदा उसका शुक्र करो,
तुमसा जो नहीं किया हमने।
2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

kamal jha

90 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10991 कविताएं

View Profile