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बेबस थीं कभी सांसे मेरी

Mamta Kumari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ऐसी बेवक्त उलझी थी
        
                                                    
                            
किस्मत के
न होश में हम थे
न वक्त का ठिकाना
अचानक जैसे हलचल मची हो
जब तक समझ पाते कुछ
सब कुछ दांव पे लग चूका था
क्रूर था वो पल ,
जिसे हम छनीक
खुशी के लिए खो चुके थे
गम ही गम है अब
दिल रोता है
लेकिन शिकायत भी नही करना
किसी से
क्यूंकि....
जब दिल से हो रिश्ता दिल का
तो घुट घुट के जीना बेहतर है
क्या शिक्वा क्या शिकायत
खुश रहें वो आबाद रहें
हम जिनकी दी हुई
सजा आजीवन भुगतने पे मजबूर हैं....
बेबस थीं सांसे मेरी कल
और आज हम लाचार हैं,...
2 वर्ष पहले
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